Celebrity Net Worth IPO क्‍या होता है | IPO कैसे खरीदा जाता है ?

IPO क्‍या होता है | IPO कैसे खरीदा जाता है ?

0 Comments


पिछले दो सालो से Stock market में NSE और BSE में लगभग 100 से ऊपर Companies stock market में IPO के जरिये लिस्ट हुई हैं। Stock market kya hota hai ये तो आप लोगों को पता ही होगा। Share market में लिस्ट होने के लिए Companies IPO निकालती हैं। आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे की IPO Kya hota hai , Companies IPO क्यों और कैसे ऑफर करती हैं ? IPO Full-Form,  B ? IPO के फायदे और  नुकसान के साथ हम यह भी जानेगे की IPO कितने प्रकार का होता है और आप IPO में कैसे निवेश करते हैं?

IPO Full Form in Hindi 

IPO का फुल फॉर्म होता है Initial Public Offering  Hindi में जिसे आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) यह पहली बार होता है जब किसी personal Companies का Stock जनता को खरीद के लिए उपलब्ध कराया जाता है। 

Share market mai IPO क्या होता है? | What is IPO Meaning in Hindi  

  

IPO का अर्थ है Initial Public offering. जब कोई भी ऐसी Company public से पैसे जुटाना चाहती है, जो कभी एक small company हुआ करती थी पर अब उसकी market में अच्छे level पर growth हो चुकी है, तब वह Company पहली बार अपने Shares को आम Public द्वारा खरीदे जाने के लिए sell करती है, और इसी को Initial Public offer कहा जाता है। ऐसा करने के लिए उस Company को stock market में सूचिबद्ध होना पड़ता है। 

Companies IPO क्यूँ और कैसे offer करती हैं?

इस सवाल का जवाब जानने के लिए Companies के funding स्तरों को समझना necessarY है। कोई भी Company शुरू होती है आपने founder की savings के पैसों से, इस निवेश को permoter funding कहा जाता है। ये fundjng का पहला level होता है। दूसरे leyel पर, जब company की कुछ growth होने लगती है तब Angel investors उसे fund karte हैं।

तीसरे स्तर पर venture capital firms या private equity firms Company में Invest किया करती हैं। और इनके बाद आता है चौथा level यानि IPO। इसके लिए सबसे पहले Companies National Stock Exchange या Bombay stock Exchange में सूचिबद्ध की जाती है। और फिर अलग-अलग प्रकार के Investors इस IPO में Invest किया करते हैं। IPO IPO जुटाने का एक अच्छा तरीका है। 

कोई भी IPO तब ऑफर करती है जब:

Company का विस्तार किया जाने वाला हो क्योंकि ऐसा करने के लिए funds की आवश्यकता होती है।कंपनी को अतीत में लिए गए कर्ज़ उतारने हों तो यह डेट चुकाने के लिए money collect करने का अच्छा तरीका माना जाता है।कंपनी के शुरूआती Investors Company से Exit चाहते हों। क्योंकि IPO में Investors की मात्रा अधिक होने के कारण Investors की liquidity बहुत बढ़ जाती है IPO कैसे काम करता है?

IPO के काम करने के निम्लिखित तरीके हैं जो नीचे आपको Step vise बताएगे हैं :

STEPS कोई भी Company जो Public issue लेकर आना चाहती है वह Stock market में लिस्ट होने के लिए सबसे पहले एक Investment को इस काम के लिए नियुक्त करती है। Investment invest को Merchant भी कहा जाता है।

Bank की नियुक्ति करने से पूर्व वह Company Investment Bank का पूर्ण विश्लेषण किया करती है, जैसे बैंक की प्रतिष्ठा, उसका Trade record, वह बैंक कितनी अच्छी marketing कर सकता है (अर्थात उसकी Distribution Expertise कैसी है), इत्यादि।

 फिर वह Companies due diligence या Filing की process को पूरा करती है (यानि legal process को पूरा करती है)। इसके अधीन सबसे महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया Under Writing की होती है जिसके तहत कई प्रकार के समझौते किए जाते हैं जैसे, Firm comitment (Bank Companies को यह Gauranty देता है कि IPO से एक minimum amount company को प्राप्त होगी, अगर इस minimum Amount से अधिक धन की प्राप्ति होती है

तो वह बैंक का Profit होगा और अगर minimum amouny से कम धन प्राप्त होता है तो बची हुई Bank amount अपनी ओर से Company को देगा), बकम Bank comitment(अर्थात बैंक अपनी ओर से शेयर्स बेचने का संपूर्ण प्रयास करेगा परंतु subscription कितना होगा बैंक इसकी गारंटी नहीं लेता), सिंडिकेट अंडर राईटिंग (अगर IPO बहुत बड़ा है तो Main bank बहुत से Bank को appoint कर उनमें IPO के छोटे -छोटे part बाँट देता है और फिर ये सारे Bank एक ही Companies के IPO बेचते हैं)।

IPO

Underwriting के बाद Company की सारी जानकारी Red Hearing prospectus नामक एक Document में लिखी जाती हैं। फिर Bank Compliance और Filing की प्रक्रिया पूर्ण करता है। अगली process मूल्य निर्धारण की होती है जिसमें यह तय किया जाता है कि Company के कितने % Shares को बेचने की आवश्यकता है (इसको issue Share कहा जाता है),

हर Share का क्या price होना चाहिए (इसको issue price कहा जाता है), shares की संख्या कितनी होनी चाहिए, minimum Lot size कितना होना चाहिए यानि एक Investors को minimus कितने Shars खरीदना Necessary है।

इसके पश्चात investment bank और Company मिल कर Distribution की process को अंजाम देते हैं जिसमें issue को qualifies Institutional,Non Institutional buyer, और Retail investors में बेचा जाता है।

इसके पश्चात Applications की process शुरू होती है। कई बार IPO में over subscription भी हो जाती है, ऐसी situation में हर किसी को Shares मिले ऐसा ज़रूरी नहीं होता।Application Process के बाद Share Allotment की process शुरू होती है और फिर stock exchange में company की listingd होती है।IPO कितने प्रकार का होता है?

 

IPO के मूल्य निर्धारण में दो प्रकार के इशू होते हैं, 

FIXED PRICE ISSUE– जिसके तहत हर शेयर का एक निश्चित मूल्य पहले ही निर्धारित कर दिया जाता है।BOOK BUILDING ISSUE– जिसके तहत shares का एक price band निर्धारित किया जाता है, फिर आने वाली Applications को मद्देनजर रखते हुए Shares का fix price तय किया जाता है। Price band की minimum और maximum amount के बीच 20% से ज़्यादा का अन्तर नहीं हो सकता।IPO में कैसे निवेश करें? आईपीओ कैसे खरीदें 

Rules के मुताबिक IPO में 50% कोटा Qualified Institutional Buyers के लिए होता,Non Institutional Buyer (जो 2 लाख या उससे अधिक amount invest करना चाहते हैं) के लिए होता है, एवं 35% कोटा Retail investors(जो 2 लाख से kam amount invest करना चाहते हैं) के लिए होता है। 

आईपीओ से पहले निवेश कैसे करें?

IPO में Invest करने के लिए या यूँ कहे IPO खरीदने के लिए DEMAT अकाउंट का होना आवश्यक है। Demat अकाउंट क्या होता है जानिए और अकाउंट खोलने के पश्चात किसी भी कंपनी के IPO में Invest किया जाता सकता है। IPO में UPI और Net Banking से Invest करने के Option available हैं। UPI का Use करने के लिए Brokerage की App या Website द्वारा invest किया जा सकता है।

Network द्वार Invres करने की Proded को ASBA प्रक्रिया कहा जाता है। परंतु IPO में Invest करने से पूर्व Company को suffering करना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, इससे Companies का Future में क्या हाल रहेगा इसका अनुमान लगाया जा सकता है।
Company lotteryओवर subscription situaltion में IPO का के द्वारा अलॉटमेंट किया जाता है। आम तौर पर IPO 3-5 दिनों के लिए खुलते हैं, जिसकी जानकारी कई wesites पर मिल जाती है।

IPO में Invest करने से पूर्व Company से संबंधित सारी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। IPO में Investment सदैव Proffitable रहे ऐसा आवश्यक नहीं है। Investment करने से पहले उससे संबंधित सभी Information प्राप्त कर लेने में समझदारी है। अतः किसी भी IPO में सोच-समझकर ही निवेश करें।

IPO में निवेश करने के फायदे और नुकसान क्या हैं ? | IPO Advantages and Disadvantages

Initial Public Offering में invest करने से Investorr को किसी Company का Share उसके minimum price band में मिलने की उम्मीद होती है। minimum price band में Share मिलने पर Invsstment future में price ऊपर जाने पर अच्छी earning या Reaturn हासिल करने में सफल होता है। मगर IPO में Invest करने के LOSS भी हैं जिसका उदाहरण हम LIC के IPO से देख सकते हैं।

LIC का आईपीओ 949 रूपए/प्रति share के हिसाब से लिस्ट हुआ था। ऐसा मन जारहा था कि LIC जैसी पुरानी all companies और विश्व की सबसे बड़ी कंपनी के IPO में निवेश करना फायदेमंद रहेगा। मगर जिन भी लोगों ने इसमें निवेश किया उन्हें काफी घाटे सौदा देखें की मिला। LIC का HKHARE आज का बाजार (3 अक्टूबर 2022) के दिन market बंद होने के समय 620 रूपए/ot पर Trade हो रहा था। इससे हमें यह पता चलता है की , IPO में INVEDT benefit का सौदा साबित हो यह जरुरी नहीं। Investors को इससे काफी loss भी उठाना पड़ सकता हैं
 

Tags:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *